केतु को ज्योतिष में एक छाया ग्रह माना जाता है। इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता, फिर भी इसका प्रभाव मानव जीवन पर अत्यंत गहरा और रहस्यमय होता है। केतु को मोक्ष, वैराग्य और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना गया है। यह व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से हटाकर आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करता है।
केतु का प्रभाव जीवन में अचानक परिवर्तन, अंतर्मुखी प्रवृत्ति और गहन चिंतन को जन्म देता है। यह ग्रह मनुष्य को भौतिक सुखों से दूर कर आत्मिक शांति और आत्मबोध की खोज में प्रवृत्त करता है। जिन जातकों की कुंडली में केतु मजबूत होता है, वे अक्सर साधना, ध्यान और आध्यात्मिक मार्ग की ओर आकर्षित होते हैं।
केतु का रंग धूसर माना गया है, जो त्याग, रहस्य और निर्लिप्तता का प्रतीक है। इसकी दिशा उत्तर-पूर्व मानी जाती है, जिसे ईशान कोण भी कहा जाता है — यह दिशा ज्ञान, ईश्वर और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ी हुई मानी जाती है।
सकारात्मक रूप में केतु व्यक्ति को अहंकार से मुक्त कर आत्मिक ऊँचाइयों तक पहुँचाता है, वहीं नकारात्मक स्थिति में यह भ्रम, असंतोष और मानसिक उलझन भी उत्पन्न कर सकता है। इसलिए केतु का संतुलन जीवन में अत्यंत आवश्यक माना गया है।
👉 केतु हमें सिखाता है कि सच्चा सुख बाहरी संसार में नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर निहित है।